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DWARKADHEESH | Full Episode 52 | श्री कृष्ण लीला | Krishna Leela | द्वारकाधीश

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जय हो तुम्हारी जय हो प्रभु कोई आवश्यक तो नहीं कि कल इनके भाग्य में ये एक चावल का दाना भी लिखा हो। ऐसे कैसे जीवन बीतेगा ? सत्यभामा सुदामा एक सच्चे ब्राह्मण है। जिनका यह धर्म है कि वो अपने ज्ञान का व्यापार ना करें। अपने जीवन निर्वाह के लिए पांच घरों से जो भिक्षा मिले उसी में संतोष कर अपना जीवन बिताएं। सुदामा भी वही कर रहे हैं। जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा भिक्षाम देही माते भिक्षा देही माते जय विप्र सुदामा साहे धर्म निष्ठान अति दरिद्र होकर भी जो रखे धर्म का मान भिक्षा के द से चले चले जिसका घर पांच घरों के बाद वो जाए ना छठवे द्वार जाए ना छठवे द्वार आभार श्री कृष्ण आपकी असीम दया और कृपा के लिए आभार । सत्यभामा संतोष तो देखिए सुदामा के मन का दो मुट्ठी भर अनाज भी ना मिला होगा । किंतु तब ईश्वर के नाम का जप करते हो उनका उपकार ही मान रहे हैं । कोई लड़ाई नहीं ईश्वर से कोई उलाहना नहीं। उल्टा ईश्वर की कृपा का भाव। अपने मित्र, अपने सुदामा की ऐसी भावना को मैं भी प्रणाम करता हूं। प्रभु यदि इतना ही प्रेम करते हैं इन्हें तो इनके दुख दूर क्यों नहीं कर देते ? स्वामी आपकी लीला आप ही जाने पर हम पुनः आपसे कह रहे हैं अपने परम भक्त की और उनके परिवार की सहायता आपको करनी ही चाहिए। कैसे उनका कष्ट आपके हृदय को व्यतीत नहीं सत्यभामा मेरे भक्त को कष्ट हो और मेरा हृदय ना रोए ऐसा संभव है क्या ? हां मां। मैं तो अभी दौड़ कर उनके पास चला जाऊं। पर उन्होंने संतोष और धैर्य की इतनी बड़ी चट्टान बना रखी है अपने सामने।

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