Unknown Title
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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकात हजरत अली रज़ अल्लाहु ताला अनू की खिदमत में एक शख्स हाजिर हुआ और निहायत दर्द भरे लहजे में अर्ज करने लगा या अमीरुल मोमिनीन मैं हमेशा उदास रहता हूं। तनहाई वीरानी और दिल की उदासी मेरा [संगीत] पीछा नहीं छोड़ती। मैं चाहता हूं खुश रहूं। मुतमई रहूं मगर यह उदासी खत्म ही नहीं होती। आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों है ? यह सुनकर हजरत अली रजिलाहु ताला अनू ने निहायत हिकमत आेज निगाह से उसकी तरफ देखा और फरमाया ऐ शख्स जिस इंसान की रूह कमजोर हो जाती है वह हमेशा तन्हाई और उदासी में मुबतला रहता है। उसने फौरन अर्ज किया या अली रजिलाहु ताला अनू अगर मेरी [संगीत] रूह कमजोर है तो मैं उसे ताकतवर कैसे बनाऊं और आखिर यह कमजोर क्यों हुई ? हजरत अली रजिलाहु ताला अनू ने फरमाया ऐ शरीफ इंसान इंसान की सबसे और बार-बार दोहराई जाने वाली गलती यह है कि अपनी खुशी दूसरों में [संगीत] तलाश करता है। फिर आप रज अल्लाहहु ताला अनू ने वजाहत फरमाई। वह अच्छे कपड़े इसलिए [संगीत] पहनता है कि लोग तारीफ करें। जब तारीफ नहीं होती तो खुशी भी नहीं मिलती। वह मोहब्बत इस उम्मीद पर करता है कि बदले में उसे भी वैसी ही मोहब्बत मिले। जब ऐसा नहीं होता तो वह टूट जाता है। वह हमदर्दी करता है, रहम करता है, फिक्र करता है, कुर्बानियां देता है। यहां तक कि अपनी औलाद की बेहतरीन परवरिश करता है। लेकिन हर नेकी के साथ एक [संगीत] तवकको बांध लेता है कि बदले में मुझे भी वही मिलेगा। और जब यह सब कुछ वापस नहीं मिलता तो इंसान अंदर से बिखरने लगता है। उदास रहने लगता है और यूं दिन-बदिन उसकी रूह कमजोर [संगीत] होती चली जाती है। फिर हजरत अली रजिलाहु ताला अनू ने निहायत गहरी बात फरमाई। याद रखो अगर तुम चाहते हो मजबूत हो, ताकतवर हो तो अपनी खुशी दुनियावी चीजों के साथ वाबस्ता मत करो बल्कि उसे [संगीत] अपने अंदर तलाश करो। अगर कोई तुम पर तनकीद करे तो सब्र करो। अगर कोई तुम्हारी तारीफ ना करे तो नजरअंदाज करो। अगर कोई तुम्हारा बदला