Himalaya के महायोगी पूर्णमगिरी जी ने की चेतावनीपूर्ण भविस्य वाणी। Alarming predictions forcoming yrs
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आज हम गंगोत्री के हमारे परम गुरु पूनम गिरी महाराज जी के दर्शन कर रहे हैं उनके चरणों में आए हैं उनके शरण में आए हैं और हमारा बड़ा सौभाग्य है क्योंकि पिछली बार में करीब छ सात महीने पहले मिला जब महाराज अपनी शीतकाल की जो कठिन उग्र साधना होती है उसके लिए अज्ञात स्थान पर चले गए थे और अभी महाराज के फिर से मुझे दर्शन हो पा रहे हैं और मैं आपको बयान नहीं कर पा रहा हूं क्या आनंद हमारे भीतर हो रहा है उनको देख के उनके सामने उनके सम्मुख आके उनके चरणों में विराजमान होके और तो महाराज सबसे पहले प्रणाम आपको और महाराज सबसे पहले तो यह बताइए आपका जो छ महीने की साधना रही किस तरह रही आनंद पूर्व की होती छ महीने का साल जो साधना है रहो उस समय आप किसी लोगों को मिलते नहीं है मिलते क्यों नहीं है जी महाराज हा जो क्षेत्र में हमारे संपर्क में रहते हैं आते हैं मिलते हैं जी महाराज हा ऐसा थोड़ी है हा य है कि आप लोगों से नहीं मिलते उस काल में जी महाराज जी जी बिल्कुल ये तो होता है ऐसा कुछ नहीं जी महाराज महाराज बहुत लोग आपको याद कर रहे थे आपके में चर्चा करा जी महाराज अभी महाराज मैं जैसे आप इतने अपने शीतकाल के उससे आए साधना की बात ऐसा है जी महाराज हमारे शास्त्रों में लिखा है जी महाराज कि प्रलय होती है जी महा प्रलय होती है हां खंड प्रलय होती है जी महाराज और पृथ्वी नतल में चली जाती है पृथ्वी एका जल में डूब जाती है ये परमात्मा नहीं करता है ये हम लोग मनुष्य और हम लोग ही करते हैं इस चीज को जो यह होता आ रहा है जी अब एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई स्थिति जो शायद यह समझना मुश्किल है अच्छा ऐसा आभास हो रहा है जी हमारी पृथ्वी जो है सा डिग्री के अंश पर है हा और 6 डिग्री कोण बनाती है है पृथ्वी हमारी बोल है तो लिमिटेड है कोई भी वस्तु अग बोल लिमिट है उस जी बीच बी सेंटर में इसके लावा है हा और लावा के बाद तेल गैस खनिज और पदार्थ जी जो ठोस में धोवा तांबा पीतल सोना चांदी गोला ब सीमेंट कोला य सब चीज उसम मौजूद है और इसका दोहन हो रहा है जी इन बड़े लिखे लोगों में दुरमति आ गई दुर्बुद्धि आ गई